Romance जुल्फोकों सूखाने बहाने आती हो तुम बिखरकर ये ख़ुशबू भारी काली घटा बस शर्माकर साडी को लपेट लेती हो तुम कौन कहता है शादी के बाद romance नहीं रहता कमबख़्त हर रोज नयी सी चाहत को जागाती हो तुम गुँथती हो आटा जब हथेली से लटों को हल्की सफ़ेदी से हटाती हो तुम पास भी जाऊँ जरा तो ऑफ़िस जल्दी जाने के बहाने को दोहराती हो तुम हल्की आवाज़ में गुनगुनाते हुए रोटी प्यार से परोस लेती हो तुम तड़का देती हो सब्ज़ी को ऐसा , सारी गली को ललचाती हो तुम कौन कहता है कुछ साल बाद इश्क़ में अंगार नहीं रहता रोज़ मेरीही तपिश से तो किचन में गैस को जलाती हो तुम जुल्फोंको सूखाने बहाने आती हो तुम छोटू को स्कुल ले जाती हो तुम बिटिया की कंगी भी कराती हो तुम मांझ कर सारे बर्तन कपाल से टपकते पसीने को अंचल से पोंछ लेती हो तुम मै तो काममें व्यस्त हो जाता हूँ लेकिन काम होकर भी मुझे खाना फ़ोन कर याद दिलाती हो तुम पूछ लेती हो हुवा या नहीं उसके बाद ही खुद थोडा खा लेती हो तुम कौन कहता है ...