Posts

Showing posts from March, 2018

ध्येय

ध्येय चालुन वाट भटकी झिजलीत पायताने स्वप्नापल्याड तरीही चालायचेच आहे मरण्या अधिच असते जगण्या तुझे तराणे हरलेत श्वास तरिही बोलायचेच आहे  विजया समिप केव्हा पोहचेन कोण जाने  प्रत्येक दु:ख तरिही झेलायचेच आहे  हैराणसे मलाही जर केलेच जोखडाणे   माझा कणा म्हणे हे पेलायचेच आहे  अजय निंबाळकर

Romance

Image
Romance जुल्फोकों   सूखाने   बहाने आती हो तुम बिखरकर ये ख़ुशबू भारी काली घटा बस शर्माकर साडी  को लपेट लेती हो तुम कौन कहता है शादी के बाद romance नहीं रहता कमबख़्त हर रोज नयी सी चाहत को जागाती हो तुम गुँथती हो आटा जब हथेली से लटों को हल्की सफ़ेदी से हटाती हो तुम पास भी जाऊँ जरा तो ऑफ़िस जल्दी जाने के बहाने को दोहराती हो तुम हल्की आवाज़   में गुनगुनाते हुए रोटी प्यार से परोस लेती हो तुम तड़का देती हो सब्ज़ी को ऐसा , सारी गली को ललचाती हो तुम कौन कहता है कुछ साल बाद इश्क़ में अंगार नहीं रहता रोज़ मेरीही तपिश से तो किचन में गैस को जलाती हो तुम जुल्फोंको   सूखाने   बहाने आती हो तुम छोटू को स्कुल ले जाती हो तुम बिटिया की कंगी भी कराती हो तुम मांझ कर सारे   बर्तन   कपाल से टपकते पसीने को अंचल से पोंछ लेती हो तुम मै तो काममें व्यस्त हो जाता हूँ लेकिन काम होकर भी मुझे खाना फ़ोन कर याद दिलाती हो तुम पूछ लेती हो हुवा या नहीं उसके बाद ही   खुद थोडा खा लेती हो तुम कौन कहता है ...