भारतका अमृतमंथन
भारत का अमृतमंथन लाखों ने हमको लूटा था अंग्रेज़ों ने भी बाँटा था सोने की चिड़िया थे हम भी सब चला गया बस घाटा था हर नर नर में डर बैठा था हर घर घर घूँघट रोता था ग़ुलामी रग में भी उतरी थी स्वाभिमान का सिक्का खोटा था फिर ५७ का समर हुआ चमकी झांसी रण अमर हुआ कम एकसंघता के कारण गोरा फिरभी वह प्रबल हुवा फिरसे काला साया छाया जुलमी गोरा शासक आया ललकारी टिलक की गुंजी जब वह तख्त फिरंगी घबराया जब नमक उठाया बापू ने गोरोंको पसीना छुटा ...