कानुन नेक है

कानुन नेक है

रपट लिखायी हमने भी गरीब के मरणे की..
मुकदमा चला 
तारीख लगी
काले कौवे नाचने लगे
कॅमेरा लेकर गिध्धं
चोतर्फा गुर्राने लगे
अखबार पहले से शुरु
होकर छिपाते छिपाते
बिचमे खबर दफनाते रहे
दिन गुजरे
महीनो की गीनती सालोंमे बिती
चार बार ईसका कफन हटाया
कौवोने तो उसे जिंदा बताया
और एक तारीख जडाकर
कौवो के शहनशाहने भि ध्यान दिया!!

ढेर के निचे गढा मुर्दा खुदही मौत से 
शर्मसार बेचारा
सुना था उसने भि

देर से ही सही वहां इंसाफ होता है...!!

एक अंधी औरत का पुतला
बंद आखोसे सुन रहा था शायद..
दलीलोंको ध्यानसे..

कोई कुचल गया है गरीब को 
नशे मे चुर बडेही ईत्मीनानसे..


फीरसे कौवा बौला..
साहाब उसने दवाभी दिलाई..
मर गया था गरीब ईसमे 
उसकी क्या बुराई..

जरा बाहर जाकर देखो
ईसकी कीतनी ठाठ है..
मरे गरीब का नाम ना पुछो
वो तो जनम से ही सपाट है..

अनाज भि मिल पाता
भुका नंगा मर जाता
किसे शायद पता चलता??

वो तो नसिब अच्छा 
सहाब ने ही कुचल दिया
रस्ते नरकमे सो रहा था बेचारा 
साहबने मारकर स्वर्गमें पोहचा दिया..

अदालत ने पंद्रहं साल के 
छोटे समय मे काम को आराम से निपटाया..
मरे गवाह..
गरीब की न कोई कोई सुन पाया..


सुनाया अंधा फैसला
जो की  सबको पंसद है..
अमिरीसे देश मे सुगंध है
गरीब तो वैसेही
रास्ते की बदबुवाली दुर्गंध है

हटावो ईस कुडे को
साहाब को घर ले जावो.,
आजसे वो बाइज्जत बरी है..!
और दोचार जनोंको कुचलकर
जशन मनावो...

गिंधौने दस साल का रंगिन ब्योरा दिया
कहा
गरीब का ही है कानुन
बस चश्मदीत ना मिल पाया..!

अचान कब्रसे उसकी थोडी
मिट्टीसी हटी
और मुरदा बोल गया...

"कफन पर हाथ रखकर
केहता हुं
केवल सच कहुंगा 
सच के सिवा कुछ नहीं कहुंगा
कानुन नेक है
क्या करे बेचारा!
अमिरोकी गिनति कम और

कुचलकर मरनेवाले गरीब अनेक है..,

भारतिय न्यायालसे विशेष आभार


अजय निंबालकर

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