सैनिक

सैनिक



खर्राटे की नींद सुनाकर
बोला ख़ुद से
वह अभी वहाँ पर
मुस्तैद हमेशा जाग रहा होगा


सर्द हवा के छूते ही
ओढ़ा कम्बल
फिर बोला खुदसे
वो अभी वहाँ पर
सरहद पर बेख़ौफ़
गोलियाँ दाग़ रहा होगा

खाँसी सुनकर जब दादी की
रूठी मैया
वह उसी समय
आवाज़ बारूदों की
ख़ुदपर बरसाता होगा


जब बारिश में उलटा छाता
तन भीगा थोड़ा
ओर याद किया
वह डुबकी संग गहरायी में
दुश्मन को चौंकाता होगा


खाना खाकर यूँ दिल भरकर
दी डकार हमने
और अँगड़ायी लेकर जब
देखा TV
फिर सोचा खुद ही
हर रोज़ हमारे इस दिनक्रम में
वो रोज़ ख़बर की
पट्टी में आता होगा
यूँ
शाहिद होता होगा ....


फ़िर सोचा


मेरी सर्दी ,मेरी बारिश
ओर धूप सभी का
आँचल वो है

मेरी धरती
मेरा अंबर मेरा सागर

ओर निशा प्रभा का

रक्षक वो है


वो है तो हम है




भारतीय सेना दिवस पर सभी भारतीय सैनिकों को मेरा गर्वित प्रणाम



अजय निंबाळकर


जय हिंद



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