लज्जा


लज्जा
सीना देखो उसका अब तो उसको दबा भी देना
माँ ने दूध दिया वहीं से बात यही  बस ध्यान ये देना

कम कपड़ों में आयी है तंग स्तन का आनंद लेना
शर्म से पानी हूवा था तू जब छतपर  बारिश में भीगी थी बहना


नुक्कड़ में है मिली अकेली कसके उसको दबोच ही लेना
कुत्ते की औक़ात जो है निर्लज्जित बन सब नोच ही लेना


पिट ढिंढोरा संस्कृति का दुशासन का प्रमाण देना
बहना का भी हाल यही है तू ही नहीं ओर भी है ना ! 

शर्म करो मत उसका दामन गौण हुआ है
इज़्ज़त का मतलब समझाना
पुरुष हो तुम तो सब जायज़ है  सदैव तेरा गर्वित सीना

हिंदू मुस्लिम सिख इसायी सब का इसपे एक कहना
अत्याचारी नेक है सारे !कपड़ों को यही भुगतना !!

मानवता का धर्म किसिको समझाने पर ध्यान ना आए
घर की माता बाहर रंडी वाह रे दुनिया वाह रे परखना


धिक्कार करूँ उस मनुष्यता का लिंगभेद है जिसका धोरन
हर ममता को बाहर देखें सज्जनता ही करती शोषण

शंढो की बढ़ती आबादी ले डूबेगी तुझे मुझे भी
प्रहार करो उस दुशासन पर जो हर मुझ तुझ छिपा जो है ना

"घर की बेटी बाहर जाय तो उसके पीछे तुम भी जाना 
चीरहरित इस दुनिया में तो तुमजैसे ही वो भी तो है ना !!!"


Shame on such society....



                        -Ajay Nimbalkar

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